
इंदौर। मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर से एक हृदयविदारक खबर सामने आई है। शहर के चोइथराम मंडी क्षेत्र में सीवर लाइन की सफाई करने उतरे दो नगर निगम कर्मियों की जहरीली गैस की चपेट में आने से मौत हो गई। इस हादसे में एक अन्य कर्मचारी बाल-बाल बचा है, जिसे घायल अवस्था में अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
कैसे हुआ हादसा?
जानकारी के अनुसार, यह घटना इंदौर नगर निगम के जोन क्रमांक 13 के अंतर्गत आने वाली चोइथराम मंडी के मुख्य द्वार के पास हुई। बताया जा रहा है कि मेट्रो प्रोजेक्ट और क्षेत्र की सफाई व्यवस्था के तहत चैंबर की सफाई का काम चल रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, जैसे ही कर्मचारी चैंबर के भीतर दाखिल हुए, वे बेहोश होकर वहीं गिर गए।
मृतकों की पहचान:
हादसे में जान गंवाने वाले कर्मचारियों के नाम अजय और करण बताए जा रहे हैं। दोनों ही युवा थे और लंबे समय से सफाई कार्य से जुड़े थे। हादसे के वक्त वहां चीख-पुकार मच गई और तुरंत बचाव कार्य शुरू किया गया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी।
गैस रिसाव बना मौत का कारण?
शुरुआती जांच और मौके पर मौजूद लोगों का कहना है कि चैंबर खोलते ही उसमें से बेहद तीखी गंध आ रही थी। संभावना जताई जा रही है कि चैंबर के अंदर बनी जहरीली गैस (मिथेन या कार्बन मोनोऑक्साइड) के रिसाव के कारण दम घुटने से दोनों की मौत हुई है। हालांकि, नगर निगम प्रशासन या पुलिस की ओर से अभी तक गैस रिसाव की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और विस्तृत जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
सुरक्षा उपकरणों पर उठे सवाल
इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर सफाई कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
- क्या कर्मचारियों के पास ऑक्सीजन मास्क थे?
- क्या चैंबर में उतरने से पहले गैस की जांच की गई थी?
- क्या मौके पर सुपरवाइजर मौजूद था?
नगर निगम के जोन 13 के इस क्षेत्र में हुई लापरवाही को लेकर अब स्थानीय लोगों और परिजनों में भारी आक्रोश है। घायल कर्मचारी का इलाज जारी है, जो इस पूरे घटनाक्रम का मुख्य गवाह है।
प्रशासनिक हलचल
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और निगम के आला अधिकारी मौके पर पहुंचे। शवों को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेजा गया है। मुख्यमंत्री और स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा इस घटना पर शोक व्यक्त किए जाने की संभावना है। इंदौर मेट्रो और निगम के कार्यों के बीच समन्वय और सुरक्षा मानकों की अनदेखी को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।
निष्कर्ष
इंदौर जैसे स्मार्ट सिटी में इस तरह की घटना होना सिस्टम पर एक बड़ा दाग है। अजय और करण की मौत ने यह साबित कर दिया है कि आज भी हम सीवर सफाई जैसे जोखिम भरे कामों में तकनीक से ज्यादा इंसानी जान की बाजी लगा रहे हैं।