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स्कूल प्रबंधन की लापरवाही! बिना परमिट और 'कंडम' बस में सवार थे बच्चे; प्रशासन की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल

2025-12-14  Reporter vidisha Raghvendra Dangi  508 views

ImgResizer_20251214_1247_52686विदिशा, मध्य प्रदेश: विदिशा जिले के नटेरन क्षेत्र में रविवार को एक बड़ा और दिल दहला देने वाला हादसा हो गया। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, बहादुरपुर की एक स्कूल बस बच्चों को लेकर सांची भ्रमण पर जा रही थी कि अचानक अनियंत्रित होकर जौहद नदी के पुल से नीचे जा गिरी। इस बस में करीब 49 मासूम बच्चे सवार थे। इस भयावह दुर्घटना ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है और बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।

हादसे का मंजर: घायल बच्चों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हादसा रविवार सुबह हुआ। बस जैसे ही जौहद नदी के पुल से गुजर रही थी, तभी वह अनियंत्रित हो गई और एक झटके में पुल की रेलिंग तोड़ते हुए नीचे नदी के सूखे या कम पानी वाले तल में जा समाई। बस के नदी में गिरते ही बच्चों की चीख-पुकार से पूरा इलाका गूंज उठा।

हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग बिना समय गंवाए मौके पर पहुंचे और तुरंत राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया। स्थानीय निवासियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर बस के अंदर फंसे बच्चों को बाहर निकालना शुरू किया। यह हादसा इतना भीषण था कि बस बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई।

प्रारंभिक सूचना के अनुसार, हादसे में 15 से 20 बच्चे गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिन्हें तत्काल बासौदा स्थित अस्पताल के लिए रवाना किया गया। सूत्रों का कहना है कि लगभग सभी बच्चों को मामूली चोटें आई हैं, लेकिन चार बच्चों के हाथों में फ्रैक्चर होने की खबर है, जिससे उनकी हालत अधिक चिंताजनक बनी हुई है।

लापरवाही की इंतहा! कंडम बस और टूर परमिट नहीं

यह हादसा महज एक दुर्घटना नहीं, बल्कि घोर लापरवाही का जीता-जागता उदाहरण माना जा रहा है। स्थानीय सूत्रों ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। उनका कहना है कि जिस बस में बच्चों को शैक्षणिक भ्रमण पर ले जाया जा रहा था, वह 'कंडम' (अयोग्य और पुरानी) स्थिति में थी। इससे भी अधिक गंभीर बात यह है कि स्कूल प्रबंधन ने इस टूर के लिए आरटीओ (क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय) से आवश्यक परमिट तक नहीं लिया था।

सवाल उठ रहा है कि स्कूल प्रबंधन ने इतनी बड़ी संख्या में छात्रों की जान जोखिम में डालकर एक पुरानी और असुरक्षित बस से यात्रा क्यों कराई? बिना टूर परमिट के बस को बच्चों को ले जाने की अनुमति कैसे मिली? इन गंभीर सवालों के घेरे में अब स्कूल प्रशासन के साथ-साथ शिक्षा विभाग और परिवहन विभाग के अधिकारी भी आ गए हैं।

स्थानीय लोगों का आरोप: ‘रेलिंग होती तो टल सकता था हादसा’

स्थानीय निवासियों का स्पष्ट कहना है कि यदि जौहद नदी के पुल पर मजबूत रेलिंग या सुरक्षा घेरा होता, तो संभवतः बस पुल से नीचे नहीं गिरती और यह भीषण हादसा टल सकता था। यह आरोप सीधे तौर पर लोक निर्माण विभाग (PWD) और स्थानीय प्रशासन की लचर व्यवस्था की ओर इशारा करता है। पुल की सुरक्षा मानकों की अनदेखी के चलते आज इतने मासूम बच्चे खतरे में पड़ गए।

प्रशासन और शिक्षा विभाग की भूमिका संदेह के घेरे में

इस हादसे के बाद, अब विदिशा जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यह बड़ी प्रशासनिक विफलता है कि शैक्षणिक भ्रमण पर जा रही बस की फिटनेस और परमिट की जांच नहीं की गई। क्या विभाग बच्चों की सुरक्षा के प्रति इतना उदासीन है?

जिला प्रशासन ने मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं, लेकिन लोगों का गुस्सा शांत नहीं हो रहा है। उनकी मांग है कि न सिर्फ दोषी बस मालिक और स्कूल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो, बल्कि उन अधिकारियों पर भी कार्रवाई हो जिनकी लापरवाही के कारण यह हादसा हुआ। यह दुर्घटना सभी स्कूलों के लिए एक चेतावनी है कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए।


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