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ग्यारसपुर तहसील में 'अंधेरगर्दी': आधार सुधार के नाम पर छात्रा से वसूले 600 रुपये, SDM से हुई शिकायत

2026-02-03  Editor Shubham Jain  755 views

ImgResizer_1770121799733ग्यारसपुर: सरकारी दफ्तरों की नाक के नीचे जब भ्रष्टाचार फलने-फूलने लगे, तो आम जनता जाए तो जाए कहाँ? ताजा मामला ग्यारसपुर तहसील परिसर का है, जहाँ स्थित आधार कार्ड सेंटर पर नियमों की धज्जियाँ उड़ाते हुए एक छात्रा से जन्म तिथि सुधारने के नाम पर भारी-भरकम वसूली का सनसनीखेज मामला सामने आया है।

क्या है पूरा मामला?

सोमवार को ग्राम मानोरा की रहने वाली छात्रा आशा (पुत्री माखनलाल अहिरवार) अपनी अंकसूची के आधार पर जन्म तिथि में सुधार करवाने के लिए तहसील परिसर स्थित आधार केंद्र पहुँची थी। छात्रा का आरोप है कि केंद्र संचालक शुभम दुबे ने इस छोटे से काम के लिए उससे 700 रुपये की मांग की। जबकि शासन द्वारा आधार सुधार के लिए बेहद मामूली शुल्क निर्धारित किया गया है।

डिजिटल सबूत: फोन-पे से किया भुगतान

हैरानी की बात तो यह है कि केंद्र संचालक के हौसले इतने बुलंद थे कि उसने रिश्वत की यह राशि नकद के बजाय डिजिटल माध्यम से स्वीकार की। छात्रा के साथ आए उसके परिजन महाराज सिंह सूर्यवंशी ने संचालक की इस मनमानी को रंगे हाथों पकड़ने के लिए 600 रुपये का भुगतान फोन-पे (PhonePe) के माध्यम से संचालक के निजी खाते में किया। इस पूरी प्रक्रिया का वीडियो भी साक्ष्य के तौर पर रिकॉर्ड किया गया है, जो अब संचालक के लिए गले की फांस बन सकता है।

लगातार मिल रही थीं शिकायतें

तहसील परिसर में स्थित इस आधार केंद्र को लेकर ग्रामीण लंबे समय से दबी जुबान में शिकायतें कर रहे थे। ग्रामीणों का कहना है कि यहाँ हर छोटे-बड़े काम के लिए तय शुल्क से कई गुना अधिक पैसे वसूले जाते हैं। गरीब और कम पढ़े-लिखे ग्रामीणों को जानकारी न होने का फायदा उठाकर यह 'अंधेरगर्दी' लंबे समय से जारी थी। लेकिन इस बार छात्रा और उसके जागरूक परिजनों ने सबूतों के साथ प्रशासन का दरवाजा खटखटाया है।

SDM को सौंपी लिखित शिकायत, कार्रवाई की मांग

पीड़ित छात्रा ने अनुविभागीय अधिकारी (SDM) को लिखित शिकायती आवेदन सौंपकर संचालक शुभम दुबे के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। आवेदन में स्पष्ट किया गया है कि सरकारी परिसर के भीतर इस तरह की अवैध वसूली न केवल भ्रष्टाचार है, बल्कि गरीब छात्रों और ग्रामीणों के साथ धोखाधड़ी भी है।

अधिकारियों का क्या है कहना?

इस पूरे प्रकरण पर जब जिला ई-गवर्नेंस  के जिला प्रबंधक अमित अग्रवाल से चर्चा की गई, तो उन्होंने मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा, “स्थानीय अधिकारियों को इस मामले की जांच के निर्देश दे दिए गए हैं। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो संचालक के खिलाफ निश्चित रूप से कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जिले की अन्य तहसीलों में भी अनियमितता पाए जाने पर पहले कार्रवाई की जा चुकी है।”

अब देखना यह होगा कि क्या प्रशासन इस 'डिजिटल रिश्वतखोरी' पर लगाम लगा पाता है या फिर जांच के नाम पर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा। ग्यारसपुर की जनता को अब न्याय का इंतजार है।


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