
पटना, बिहार: पत्रकारिता की दुनिया में एक बड़ा और चौंकाने वाला घटनाक्रम सामने आया है। बिहार के डीजीपी विनय कुमार ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूर्वी चंपारण के पत्रकार संजीव जायसवाल को हिस्ट्री शीटर मानने से इनकार कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, "संजीव जायसवाल हिस्ट्री शीटर नहीं, बल्कि एक जुझारू और लड़ाकू पत्रकार हैं।" यह बयान ऐसे समय में आया है जब संजीव जायसवाल सहित तीन पत्रकारों पर झूठे मुकदमे दर्ज कर उन्हें परेशान करने का आरोप लगा है।
इस पूरे मामले में भारती श्रमजीवी पत्रकार संघ (BSPS) ने एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। संघ के संस्थापक शाहनवाज हसन के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने डीजीपी विनय कुमार से मुलाकात की और पूर्वी चंपारण के तीन पत्रकारों - संजीव जायसवाल, सागर सूरज, और नीरज कुमार - के खिलाफ दर्ज किए गए झूठे मुकदमों का मुद्दा उठाया।
क्या है पूरा मामला?
प्रतिनिधिमंडल ने डीजीपी को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें विस्तार से बताया गया कि कैसे इन पत्रकारों को गलत तरीके से फंसाया जा रहा है। ज्ञापन में बताया गया कि संजीव जायसवाल पर एससी/एसटी और रंगदारी जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इतना ही नहीं, पूर्वी चंपारण के एसपी ने अपराधियों की तरह उनके खिलाफ इश्तेहार भी जारी कर दिया है, जिसकी BSPS ने कड़ी निंदा की है। डीजीपी विनय कुमार ने इस पर तत्काल संज्ञान लिया और सीआईडी जांच का आदेश दिया है।
डीजीपी ने बीएसपीएस की इस मांग को तुरंत स्वीकार कर लिया कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक इन पत्रकारों के खिलाफ किसी भी तरह की कठोर कार्रवाई पर रोक लगाई जाए। यह फैसला पत्रकारों के लिए एक बड़ी राहत है और दिखाता है कि बिहार पुलिस प्रशासन पत्रकारों के अधिकारों और सुरक्षा के प्रति गंभीर है।
अन्य पत्रकारों की कहानी भी दर्दनाक
BSPS ने सिर्फ संजीव जायसवाल का ही मुद्दा नहीं उठाया, बल्कि दो और पत्रकारों के केस भी सामने रखे।
* सागर सूरज: वरिष्ठ पत्रकार सागर सूरज पर समाचार संकलन के दौरान जानलेवा हमला हुआ और फिर उन पर एससी/एसटी का झूठा मुकदमा दर्ज कर दिया गया। हमलावरों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिससे पत्रकारिता जगत में आक्रोश था। BSPS ने डीआईजी और एसपी को भी पत्र लिखकर इस मामले में कार्रवाई की मांग की थी, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। संघ ने डीजीपी से मांग की है कि इस मामले में शामिल पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच की जाए और सागर सूरज की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
* नीरज कुमार: दैनिक जागरण से जुड़े रहे पत्रकार नीरज कुमार पर तो हत्या का मुकदमा ही दर्ज कर दिया गया था। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के जांच आदेश के बावजूद भी इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई और नीरज को जेल भेज दिया गया। BSPS ने इस मामले की भी सीआईडी जांच की मांग की है।
डीजीपी का आश्वासन और भविष्य की दिशा
डीजीपी विनय कुमार ने भारती श्रमजीवी पत्रकार संघ के प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया है कि इन सभी मामलों की निष्पक्ष सीआईडी जांच कराई जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक किसी भी पत्रकार के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं की जाएगी। यह कदम पत्रकारों के लिए एक बड़ी जीत है और यह साबित करता है कि संगठित होकर आवाज उठाने से न्याय मिल सकता है।
इस घटनाक्रम से यह साफ है कि पत्रकारों को अब एकजुट होकर अपने अधिकारों की लड़ाई लड़नी होगी। डीजीपी का यह बयान न केवल संजीव जायसवाल के लिए, बल्कि पूरे पत्रकार समुदाय के लिए एक बड़ा समर्थन है, जो झूठे मुकदमों और पुलिसिया दमन का सामना कर रहे हैं। यह घटना हमें याद दिलाती है कि सच की आवाज को दबाया नहीं जा सकता, और अगर पत्रकार एकजुट हों तो बड़े से बड़े अन्याय के खिलाफ भी जीत हासिल की जा सकती है।