
ग्यारसपुर,: मध्य प्रदेश के ग्यारसपुर तहसील के ग्राम मानोरा में एक गरीब परिवार प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभ से वंचित होकर हर पल मौत के साये में जी रहा है। बलवीर कुशवाहा पिता मोतीलाल कुशवाहा का कच्चा मकान हर बारिश में गिरने की कगार पर पहुंच जाता है, लेकिन लाख कोशिशों के बाद भी उन्हें पक्की छत नसीब नहीं हुई।
जर्जर छत के नीचे 11 सदस्यों का दम घुटता परिवार
बलवीर का कहना है कि उन्होंने और उनके छोटे भाई ने पंचायत में तीन बार आवेदन किया, लेकिन आज तक उन्हें पीएम आवास योजना के तहत पक्का मकान नहीं मिला। एक ही जर्जर और कच्चे घर में 11 सदस्यों का बड़ा परिवार रहने को मजबूर है। बारिश के दौरान, पूरा परिवार भय के माहौल में रात गुजारता है क्योंकि मकान कभी भी ढह सकता है। ऐसे में बड़ा सवाल उठता है: अगर कोई दुर्घटना होती है तो इसका जिम्मेदार कौन होगा?
ग्राम पंचायत की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
इस मामले ने ग्राम पंचायत की कार्यप्रणाली और पात्र हितग्राहियों की अनदेखी पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों में भी इस पर भारी नाराजगी है और वे जल्द से जल्द कार्यवाही की मांग कर रहे हैं।
तकनीकी खामी या लापरवाही?
जब मानोरा पंचायत के रोजगार सहायक शैलेंद्र रघुवंशी से इस संबंध में बात की गई, तो उन्होंने बताया कि बलवीर कुशवाहा पुत्र मोतीलाल कुशवाहा का नाम सूची में भेजा गया है, लेकिन 'कोई टेक्निकल परेशानी' की वजह से अभी तक नाम नहीं आ पाया है।
अब देखना यह है कि प्रशासन कब इस गरीब परिवार की सुध लेता है और उन्हें एक सुरक्षित छत मुहैया कराता है। क्या 'तकनीकी परेशानी' वाकई इतनी बड़ी है कि एक परिवार को मौत के डर में जीने को मजबूर कर दे?