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"बकरे की जगह खुद ही कुर्बान हो गया इंसान – ईद पर हुई सबसे अनोखी बलि"

2025-06-08  Editor Shubham Jain  1,589 views

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देवरिया (उत्तर प्रदेश संवाददाता उदयराज शुक्ला जी की रिपोर्ट)। 
जब पूरा देश बकरों को सजाकर "तेरे जाने का ग़म..." गा रहा था, तब उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में एक बुजुर्ग ने नजारे को थोड़ा उल्टा कर दिया। वहां बकरे की बजाय एक इंसान ने खुद की गर्दन पर छुरी चला दी। जी हां, बकरीद पर जहां बकरा बोलने से पहले कटता है, वहां ईसमुहम्मद अंसारी नामक बुजुर्ग ने बोल-चाल के बाद खुद को ही काट दिया। अब इसे भक्ति कहें, भूत का साया या बकरे के प्रति अत्यधिक ममता – मामला पुलिस के लिए भी गुत्थी बन गया है।

"इंसान भी तो एक जानवर है, थोड़ा समझदार बकरा..."

घटना के बाद पुलिस को मौके से जो सुसाइड नोट मिला, उसने पूरे इलाके में ‘खौफ और फसाना’ दोनों पैदा कर दिए। ईसमुहम्मद ने लिखा:

> "इंसान बकरे को बेटे की तरह पालता है, फिर उसे काट देता है। वो भी एक जीव है। मैं खुद की कुर्बानी अल्लाह के नाम पर दे रहा हूं। मेरा कोई कत्ल नहीं किया गया। मेरी कब्र खूंटे के पास ही बनाना।"

 

मतलब साफ है – बकरा नहीं, इस बार खुद इंसान कुर्बानी के लिए तैयार हुआ। लगता है बुजुर्ग को बकरों से गहरा प्रेम था या शायद उन्होंने "Save Animals" आंदोलन को कुछ ज़्यादा ही दिल से लगा लिया।

घरवाले हक्के-बक्के, मोहल्ले में मातम और मीम

ईसमुहम्मद के परिवार में पत्नी हाजरा खातून और तीन बेटे हैं – अहमद, फैज़ और ताज। दो बेटियां हैं जिनकी शादी हो चुकी है। पेशे से मज़दूर रहे ईसमुहम्मद की जिंदगी में गरीबी तो थी, मगर गिला-शिकवा कोई नहीं। मोहल्लेवालों के मुताबिक वे नमाज़ी इंसान थे, किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी और त्योहार वाले दिन भी मस्जिद जाकर लौटे थे।

पर इसके बाद उन्होंने ऐसा काम कर दिया, जिसे देख मोहल्ला तो क्या, सोशल मीडिया तक दंग रह गया। एक ओर बकरों की गर्दनें हलाल हो रही थीं, दूसरी ओर एक इंसान ने खुद को ‘कुर्बान’ कर दिया।

पत्नी बोलीं – “भूत-प्रेत का मामला है साहब”

अब जहां मामला साफ लग रहा था, वहां कहानी में ट्विस्ट आया। मृतक की पत्नी हाजरा खातून ने एक नया एंगल दिया। उन्होंने बताया,

> “मेरे शौहर पर भूत-प्रेत का असर था। अक्सर आज़मगढ़ की दरगाह जाया करते थे। तीन दिन पहले ही लौटे थे। ईद के दिन झोपड़ी में धूपबत्ती और कुछ तंत्र-मंत्र कर रहे थे, फिर अचानक चीख सुनाई दी और देखा तो खून से लथपथ गिरे पड़े थे।”

 

पास में भुजाली (तेजधार औज़ार) पड़ी थी, और तंत्र-मंत्र का धुआं अब तक वातावरण में तैर रहा था। साफ है – ये कोई साधारण ‘इमोशनल’ कुर्बानी नहीं, यहां या तो अंधश्रद्धा थी, या कोई ‘ओटीटी’ लेवल की स्क्रिप्ट!

पुलिस: फिलहाल आत्महत्या मान रहे हैं, बाक़ी जांच जारी है

पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। सुसाइड नोट, तंत्र-मंत्र का माहौल, भुजाली, और आत्मबलिदान का जज़्बा – इन सबको देखकर फिलहाल इसे आत्महत्या ही माना जा रहा है। पुलिस ने बताया कि फील्ड यूनिट ने जरूरी सबूत इकट्ठा कर लिए हैं और सभी पहलुओं पर जांच की जा रही है।

थाने के एक सिपाही ने नाम न छापने की शर्त पर कहा,

> "ऐसा मामला पहली बार देखा है साहब! बकरा डर के मारे कांप रहा था, और आदमी खुद ही छुरी लेकर आगे आ गया।"

 

बकरे की जान बची, इंसान चलाहै गया – सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं

घटना के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं। किसी ने इसे ‘बकरीद की सबसे बड़ी कुर्बानी’ बताया, तो किसी ने कहा – “बकरों को बख्श दो, इंसानों में खुद को काटने का हौसला आ गया है।” 
एक यूज़र ने लिखा:

> “ये तो हुआ बकरों के हक में ऐतिहासिक फैसला – इंसान खुद चढ़ गया बलि पर।”

 

कहानी का अंत: धर्म, धारणा या धोखा?

ईसमुहम्मद की खुद को दी गई ‘कुर्बानी’ ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं –

क्या ये धर्म की ग़लत व्याख्या का नतीजा है?

क्या भूत-प्रेत की अवधारणा ने एक ज़िंदा इंसान को मौत के मुंह में धकेल दिया?

या फिर ये सिर्फ एक डिप्रेशन से जूझते इंसान की खामोश चीख थी?


जवाब जो भी हो, मगर एक बात साफ है – देवरिया की इस ‘बलिदान लीला’ ने बकरों को राहत दी है और पुलिस को सिरदर्द।


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