आरोन (गुना): मध्य प्रदेश के बिजली विभाग में लापरवाही और तानाशाही के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। ताजा मामला आरोन विकासखंड के रामपुर डीसी (Distribution Center) से सामने आया है, जहाँ एक किसान शासन की 'समाधान योजना' का लाभ लेने के बावजूद खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है। आरोप है कि विभाग के अधिकारियों ने बिल तो जमा करा लिया, लेकिन किसान का निजी ट्रांसफार्मर वापस करने से साफ इनकार कर दिया है।
क्या है पूरा मामला?
मूडराखुर्द के पीड़ित किसान पहलवान सिंह रघुवंशी ने जिले के उप महाप्रबंधक (DGM), गुना को लिखित शिकायत सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है। किसान के अनुसार, उनका खेत पंप कनेक्शन (N2040011393) साल 2017 में बोर फेल होने के कारण बंद करने के लिए आवेदन दिया गया था। उस समय 30 हजार रुपये का बकाया बिल भी जमा कर दिया गया था, लेकिन तत्कालीन जेई (JE) की लापरवाही से कागजों में कनेक्शन बंद नहीं हुआ।
लाखों का बिल और अधिकारियों का ‘खेल’
सालों तक बंद पड़े कनेक्शन का बिल बढ़ते-बढ़ते 1 लाख 87 हजार रुपये तक पहुँच गया। जब शासन ने 'समस्या समाधान योजना' लागू की, तो किसान के मोबाइल पर मैसेज आया। विभाग के अधिकारियों ने बताया कि योजना के तहत मात्र 90 हजार रुपये जमा करके मामला खत्म किया जा सकता है।
पीड़ित किसान का कहना है कि साल 2017 में लाइनमैन विनोद केवट और जगदीश सिंह उनका 63 KVA का निजी ट्रांसफार्मर यह कहकर उठा ले गए थे कि बिल जमा होने पर इसे लौटा दिया जाएगा।
पैसे जमा होते ही बदले जेई के सुर
किसान पहलवान सिंह ने अधिकारियों की बातों पर भरोसा कर जैसे-तैसे 90 हजार रुपये की भारी-भरकम राशि जमा कर दी। लेकिन जब उन्होंने अपना ट्रांसफार्मर वापस मांगा, तो रामपुर डीसी के वर्तमान जेई अनिकेत सिंह ने दो टूक कह दिया कि "ट्रांसफार्मर अब वापस नहीं मिलेगा।" किसान का आरोप है कि उन्हें गुमराह कर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। एक तरफ किसान खेती की लागत और कर्ज से परेशान है, वहीं दूसरी ओर विभाग के जिम्मेदार अधिकारी अपनी बातों से मुकर कर किसानों का शोषण कर रहे हैं।
ग्वालियर चीफ इंजीनियर तक जाएगी शिकायत
पीड़ित किसान ने चेतावनी दी है कि यदि उप महाप्रबंधक गुना द्वारा उनकी समस्या का निराकरण नहीं किया गया और उनका निजी ट्रांसफार्मर वापस नहीं मिला, तो वे विवश होकर चीफ इंजीनियर (ग्वालियर) के पास गुहार लगाएंगे।
यह मामला प्रदेश सरकार के उन दावों पर सवाल खड़ा करता है जिनमें किसानों के हित और बिजली विभाग में पारदर्शिता की बातें की जाती हैं। अब देखना यह है कि विभाग अपने लापरवाह अधिकारियों पर क्या कार्रवाई करता है और किसान को उसका हक मिलता है या नहीं।