
सीधी: मध्यप्रदेश के सीधी जिले में भ्रष्टाचार अब अपवाद नहीं, बल्कि 'शिष्टाचार' बनता जा रहा है। प्रशासनिक गलियारों में रिश्वतखोरी की जड़ें इतनी गहरी हो चुकी हैं कि लोकायुक्त की ताबड़तोड़ कार्रवाइयों के बावजूद सरकारी मुलाजिमों के मन में कानून का खौफ खत्म हो चुका है। ताजा मामला राजस्व विभाग से सामने आया है, जहाँ एक पटवारी को अपनी जेब गरम करना भारी पड़ गया।
फरियादी किसान को बनाया 'शिकार'
मिली जानकारी के अनुसार, पटवारी मुनींद्र सिंह भदौरिया ने एक किसान मुनीश्वर प्रसाद सोनी से उनके जायज काम के बदले मोटी रकम की डिमांड की थी। किसान मुनीश्वर प्रसाद अपनी 'इतालवी बारिशनना' (उत्तराधिकार नामांतरण) के काम के लिए पटवारी के चक्कर काट रहा था। नियमतः जो काम सरकारी प्रक्रिया का हिस्सा है, उसके लिए पटवारी ने किसान पर 50,000 रुपये देने का दबाव बनाया।
लोकायुक्त रीवा की जाल में फंसा 'रिश्वतखोर'
पटवारी की अवैध मांग से परेशान होकर किसान मुनीश्वर प्रसाद ने घुटने टेकने के बजाय ईमानदारी का रास्ता चुना। उन्होंने इसकी शिकायत लोकायुक्त कार्यालय रीवा में की। शिकायत की पुष्टि होते ही लोकायुक्त की टीम ने जाल बिछाया। जैसे ही पटवारी मुनींद्र सिंह भदौरिया ने किसान से रिश्वत की पहली किश्त स्वीकार की, पहले से घात लगाकर बैठी लोकायुक्त टीम ने उन्हें रंगे हाथों दबोच लिया।
भ्रष्टाचार का गढ़ बनता राजस्व विभाग?
सीधी जिले में यह कोई पहला मामला नहीं है। पिछले कुछ महीनों में लोकायुक्त ने कई अधिकारियों और कर्मचारियों को सलाखों के पीछे भेजा है, लेकिन राजस्व विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार थमने का नाम नहीं ले रहा है। आम जनता का कहना है कि बिना 'सेवा शुल्क' (रिश्वत) के फाइलों का आगे बढ़ना नामुमकिन हो गया है।
> "भ्रष्टाचार के खिलाफ हमारी जीरो टॉलरेंस की नीति है। पटवारी को रंगे हाथों पकड़ा गया है और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आगे की कार्रवाई की जा रही है।" - लोकायुक्त टीम सदस्य
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कार्रवाई से मचा हड़कंप
लोकायुक्त की इस अचानक हुई कार्रवाई से तहसील कार्यालय और राजस्व विभाग के अन्य कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है। कई कर्मचारी अपनी सीटें छोड़कर गायब नजर आए। फिलहाल, आरोपी पटवारी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है और उनके पुराने रिकॉर्ड्स की भी जांच की जा रही है कि कहीं उन्होंने और भी किसानों को अपना शिकार तो नहीं बनाया है।
निष्कर्ष
यह घटना इस बात का प्रमाण है कि यदि जनता जागरूक हो और रिश्वत देने के बजाय शिकायत का साहस दिखाए, तो इन 'दीमकों' का सफाया किया जा सकता है। पटवारी की यह गिरफ्तारी जिले के अन्य भ्रष्ट अधिकारियों के लिए एक कड़ा संदेश है।