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भोपाल: तीन साल बाद न्याय की जीत, लेकिन बच्ची के दिल पर गहरा ज़ख्म

2025-11-08  Amit raikwar  319 views

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भोपाल। राजधानी भोपाल में तीन साल पहले हुई एक हृदय विदारक दोहरी हत्या के मामले में गुरुवार को अपर सत्र न्यायाधीश जयंत शर्मा की अदालत ने एक कठोर फैसला सुनाया है। अदालत ने मुख्य आरोपी सुनील मालवीय और उसके सहयोगी देवेंद्र मालवीय को दोहरे आजीवन कारावास (Double Life Imprisonment) की सज़ा सुनाई है। यह फैसला 18 जुलाई 2022 को अशोका गार्डन इलाके में हुई उस जघन्य वारदात से जुड़ा है, जिसने इंसानियत को झकझोर कर रख दिया था।

हैवानियत का सबसे दर्दनाक गवाह: 6 साल की मासूम

इस मामले को 'कठोर दंड' योग्य बनाने वाली सबसे बड़ी वजह यह थी कि यह पूरी वारदात आरोपी ने अपनी 6 साल की मासूम बेटी के सामने की थी। बच्ची, जो पैर से दिव्यांग है, उसने अपनी मां रचना उर्फ अरुणा और सौतेले पिता राजेंद्र सिंह मालवीय को अपने पिता द्वारा बेरहमी से चाकुओं से गोदते हुए देखा था। बच्ची ने चीखते हुए अपनी मां को बचाने की कोशिश भी की, लेकिन आरोपी के गुस्से के आगे उसकी एक न चली। यह दृश्य बच्ची के मन पर एक ऐसा ज़ख्म छोड़ गया है, जिसे शायद ही कोई भर पाए।

💔 'न' सुन नहीं पाया, तो बन गया कातिल

पुलिस रिकॉर्ड्स के अनुसार, आरोपी सुनील मालवीय विदिशा जिले के शमशाबाद का निवासी है। सुनील और रचना ने साल 2016 में नोटरी विवाह किया था, और उनकी एक बेटी भी हुई। हालांकि, कुछ सालों बाद रचना का परिचय राजेंद्र सिंह मालवीय से हुआ, और दोनों में प्रेम संबंध स्थापित हो गए। रचना ने सुनील से अलग होकर राजेंद्र से कोर्ट मैरिज कर ली।

पुलिस ने बताया कि रचना के इस फैसले से सुनील बेहद नाराज था। वह लगातार रचना पर फिर से साथ रहने के लिए दबाव डाल रहा था। जब रचना ने स्पष्ट तौर पर इनकार कर दिया, तो गुस्से और बदले की भावना में आकर सुनील ने अपने सहयोगी देवेंद्र मालवीय के साथ मिलकर यह खौफनाक साजिश रची।

🩸 सुनियोजित तरीके से किया दोहरा हत्याकांड

वारदात वाले दिन, सुनील और देवेंद्र भोपाल के अशोका गार्डन में रचना और राजेंद्र के किराए के मकान पर पहुंचे। पुलिस चार्जशीट में बताया गया कि दोनों आरोपी पहले से ही हत्या की पूरी तैयारी करके आए थे। पहले झगड़ा हुआ और फिर सुनील ने अचानक चाकू निकाला और रचना व राजेंद्र पर ताबड़तोड़ वार कर दिए। दोनों की मौके पर ही मौत हो गई।

घटना के बाद आरोपियों ने फरार होने की कोशिश भी की, लेकिन भोपाल पुलिस की त्वरित कार्रवाई से दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया। इस हाई-प्रोफाइल केस ने राज्यभर में सुर्खियां बटोरी थीं, और पुलिस ने पुख्ता सबूतों के साथ चार्जशीट पेश की।

⚖️ कोर्ट ने कहा: ‘समाज में भय और असुरक्षा’

सुनवाई के दौरान अदालत ने आरोपी के कृत्य को इंसानियत की हदें पार करने वाला बताया। कोर्ट ने टिप्पणी की कि आरोपी ने न केवल योजनाबद्ध तरीके से हत्या को अंजाम दिया, बल्कि अपनी ही बेटी के सामने यह अपराध किया, जिससे समाज में भय और असुरक्षा फैलती है।

न्यायाधीश जयंत शर्मा की अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि ऐसे जघन्य अपराधों के लिए दोषियों को दोहरे आजीवन कारावास से कम सजा नहीं दी जा सकती। अदालत के इस सख्त फैसले को न्याय की जीत के तौर पर देखा जा रहा है।

🧑‍🍼 अब कौन उठाएगा मासूम की जिम्मेदारी?

अदालत के फैसले के साथ ही एक बड़ा सामाजिक सवाल भी खड़ा हो गया है। माता-पिता दोनों को अपनी आंखों के सामने खो चुकी 6 साल की दिव्यांग बच्ची की परवरिश अब कौन करेगा? सामाजिक संस्थाएं और महिला बाल विकास विभाग अब इस बच्ची के पुनर्वास और सुरक्षित भविष्य के लिए कदम उठाने की तैयारी में हैं। इस बच्ची का भविष्य अब सामूहिक सामाजिक जिम्मेदारी बन गया है।


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