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भोपाल स्लॉटर हाउस मामला: 11 साल का लंबा विवाद, करोड़ों का जुर्माना और अब 'मॉडर्न' होने की पूरी कहानी

2026-01-26  Baby jain  229 views

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भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में स्लॉटर हाउस (वधशाला) को लेकर चल रहा दशकों पुराना विवाद एक बार फिर चर्चा में है। साल 2014 से शुरू हुई कानूनी जंग, एनजीटी (NGT) की सख्ती और करोड़ों रुपये के जुर्माने के बाद अब इस मामले में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। आखिर क्यों शहर से बाहर जाने के बजाय जिंसी स्थित पुराने स्लॉटर हाउस को ही 'मॉर्डन' बनाने का फैसला लिया गया? आइए जानते हैं इस पूरे घटनाक्रम की परत-दर-परत कहानी।


2014 से शुरू हुई कानूनी लड़ाई
इस विवाद की नींव साल 2014 में पड़ी, जब विनोद कुमार कोरी ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में एक याचिका दायर की। याचिका में शहर के बीचों-बीच स्थित स्लॉटर हाउस से होने वाले प्रदूषण और रिहायशी इलाके में इसकी मौजूदगी पर सवाल उठाए गए थे। सितंबर 2015 में एनजीटी ने कड़ा रुख अपनाते हुए आदेश दिया था कि 30 जून 2016 तक स्लॉटर हाउस को शहर की सीमा से बाहर शिफ्ट किया जाए।
शिफ्टिंग के विरोध ने बदला फैसला
प्रशासन ने स्लॉटर हाउस को शहर से बाहर शिफ्ट करने की कोशिश तो की, लेकिन जहां भी नई जगह चिन्हित की गई, वहां स्थानीय निवासियों और सामाजिक संगठनों का भारी विरोध शुरू हो गया। शहर के बाहर जगह न मिल पाने और बढ़ते विरोध के बीच प्रशासन के सामने एक बड़ा संकट खड़ा हो गया था।
भारी जुर्माना और सुप्रीम कोर्ट की एंट्री
जुलाई 2019 तक जब स्लॉटर हाउस शिफ्ट नहीं हो सका, तो एनजीटी ने नगर निगम भोपाल पर पेनल्टी बढ़ाकर 2 करोड़ रुपये कर दी। इसके अलावा नियमों के उल्लंघन पर 45.70 लाख रुपये का अतिरिक्त जुर्माना भी ठोका गया। विवाद तब चरम पर पहुँच गया जब अक्टूबर 2019 में एनजीटी ने 5 करोड़ रुपये का भारी-भरकम जुर्माना लगाते हुए स्लॉटर हाउस को तत्काल बंद करने का आदेश दे दिया। हालांकि, इस मामले में नगर निगम को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली, जिसने इस आदेश पर रोक लगा दी थी।


जिंसी में ही 'मॉर्डन' स्लॉटर हाउस की मंजूरी
जब दूसरी जगह जमीन मिलना नामुमकिन हो गया, तो अगस्त 2021 में एक चार सदस्यीय समिति ने बीच का रास्ता निकाला। समिति ने निर्णय लिया कि वर्तमान स्लॉटर हाउस को ही अत्याधुनिक तकनीक (Modern Technology) से लैस किया जाए ताकि प्रदूषण कम हो और नियमों का पालन हो सके।
* अक्टूबर 2021: एनजीटी ने स्पष्ट किया कि वर्तमान स्लॉटर हाउस को ही 'मॉडर्न' बनाया जाए।
* नवंबर 2021: शासन स्तर पर मॉर्डन स्लॉटर हाउस के निर्माण की अंतिम मंजूरी दी गई।
* दिसंबर 2021: 22 दिसंबर को इसके लिए ऑनलाइन टेंडर आमंत्रित किए गए।
2025 में मिली नई सौगात
शासन के निर्देशों के अनुसार, पहले चरण में वर्तमान भूमि पर ही आधुनिक निर्माण कार्य शुरू किया गया। तमाम बाधाओं और कानूनी पचड़ों को पार करने के बाद, 7 नवंबर 2025 को इस आधुनिक स्लॉटर हाउस का संचालन शुरू कराया गया। अब यह प्लांट आधुनिक मशीनों से लैस है, जिससे स्वच्छता और पर्यावरण मानकों का बेहतर पालन होने का दावा किया जा रहा है।


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