
भोपाल। मध्यप्रदेश की सियासत में जुबानी जंग का पारा एक बार फिर चढ़ गया है। इस बार निशाने पर हैं कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह और राहुल गांधी। खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कांग्रेस के भीतर मचे आंतरिक घमासान और नेतृत्व की क्षमता पर करारा हमला बोला है। राजपूत ने दिग्विजय सिंह के "मंच प्रेम" से लेकर राहुल गांधी की "सियासी गंभीरता" तक, हर मुद्दे पर कांग्रेस को घेरा।
दिग्विजय सिंह का 'मंच मोह' और राहुल की 'बगल' वाली जगह
मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह पर चुटकी लेते हुए कहा कि राजनीति में 'मंच और स्थान' की अपनी एक अलग ही महिमा होती है। उन्होंने तंज कसा कि दिग्विजय सिंह दशकों तक सत्ता के शिखर पर रहे हैं, ऐसे में मंच के प्रति उनका मोह और लगाव होना स्वाभाविक है।
मंत्री ने सवाल खड़ा किया कि, "जब पहले यह कहा गया था कि वे (दिग्विजय सिंह) मंच पर नहीं बैठेंगे, तो फिर ऐसी क्या मजबूरी थी कि उन्हें राहुल गांधी के ठीक बगल में बैठना पड़ा?" उन्होंने इशारों-इशारों में यह संदेश दिया कि कांग्रेस में अनुशासन और कथनी-करनी के बीच बहुत बड़ी खाई है।
"राहुल गांधी को गंभीरता से नहीं लेती जनता"
कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर हमला बोलते हुए गोविंद सिंह राजपूत ने राहुल गांधी की कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न लगा दिए। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी अक्सर बिना किसी ठोस तैयारी के बयानबाजी करते हैं, यही कारण है कि देश की जनता उनकी बातों को गंभीरता से लेना बंद कर चुकी है।
मंत्री ने आगे कहा कि, "नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी मिलने के बाद भी राहुल गांधी न तो अपनी पार्टी पर और न ही सदन में अपनी पकड़ मजबूत कर पाए हैं।" उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जिक्र करते हुए कहा कि पीएम मोदी की वैश्विक छवि और काम करने के तरीके को चुनौती देना राहुल गांधी के बस की बात नहीं है।
कमलनाथ के अनुभव और 'नई कांग्रेस' का द्वंद्व
सिर्फ राहुल और दिग्विजय ही नहीं, मंत्री राजपूत ने पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ को लेकर भी सधी हुई प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्वीकार किया कि कमलनाथ एक वरिष्ठ और अनुभवी नेता हैं, लेकिन 'नई कांग्रेस' के ढांचे में अब उनकी भूमिका हाशिए पर नजर आ रही है। राजपूत का संकेत साफ था कि कांग्रेस के भीतर पीढ़ीगत और वैचारिक बदलाव अब पुराने दिग्गजों के लिए असहज स्थितियां पैदा कर रहा है।
निष्कर्ष: बिखराव की ओर बढ़ती कांग्रेस?
गोविंद सिंह राजपूत के इन बयानों ने भोपाल की सियासी फिजां में नई बहस छेड़ दी है। एक तरफ जहां भाजपा इसे कांग्रेस का आंतरिक अंतर्विरोध बता रही है, वहीं कांग्रेस की ओर से फिलहाल इस पर पलटवार का इंतजार है। लेकिन एक बात साफ है—मंच की इस लड़ाई ने कांग्रेस की अंदरूनी गुटबाजी को एक बार फिर चौराहे पर लाकर खड़ा कर दिया है।