
भोपाल। मध्यप्रदेश की आंगनबाड़ियों में बच्चों को अब पोषण आहार प्राप्त करने के लिए अपनी उपस्थिति चेहरा पहचानने वाली मशीन के सामने दर्ज करानी होगी। सरकार ने आंगनबाड़ियों की पारदर्शिता बढ़ाने और वास्तविक लाभार्थियों को पोषण आहार सुनिश्चित करने के लिए फेस रिकग्निशन सिस्टम लागू करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं।
धार जिले में इसे प्रायोगिक तौर पर शुरू कर दिया गया है। यहां आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों के नामांकन के समय उनकी तस्वीरें ली गई हैं। प्रतिदिन जब बच्चे केंद्र पर आएंगे, तब मशीन के सामने चेहरा स्कैन कराना अनिवार्य होगा। मशीन से उपस्थिति सत्यापित होने के बाद ही बच्चों को पोषण आहार प्रदान किया जाएगा।
कैसे करेगा सिस्टम काम
आंगनबाड़ी केंद्रों में फेस रिकग्निशन डिवाइस स्थापित की गई हैं।
बच्चे मशीन के सामने खड़े होंगे, जहां उनकी उपस्थिति स्वचालित रूप से दर्ज होगी।
उपस्थिति दर्ज होते ही बच्चे के नाम के साथ रिकॉर्ड अपडेट हो जाएगा।
यह डाटा रियल टाइम में एक डैशबोर्ड पर संग्रहित होगा, जिसे अधिकारी कभी भी देख सकेंगे।
पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर धार जिले से शुरुआत
सरकार ने सबसे पहले धार जिले में इस तकनीक को लागू कर इसकी व्यवहार्यता को परखा है। शुरुआती नतीजे उत्साहजनक रहे हैं। यदि यह पायलट प्रोजेक्ट सफल होता है, तो आने वाले महीनों में इसे प्रदेश के सभी जिलों में लागू किया जाएगा।
पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने का प्रयास
फेस रिकग्निशन सिस्टम से उन शिकायतों पर लगाम लगेगी, जिनमें फर्जी उपस्थिति दर्शाकर पोषण आहार वितरण के आंकड़े बढ़ाए जाते थे। इसके अलावा असली लाभार्थी बच्चों को ही समय पर पोषण आहार मिलेगा, जिससे सरकार के पोषण मिशन को मजबूती मिलेगी।
सरकारी बयान
मध्यप्रदेश महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों के अनुसार, "इस पहल का उद्देश्य आंगनबाड़ी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी और बच्चों के पोषण स्तर को बेहतर बनाना है। फेस रिकग्निशन टेक्नोलॉजी से हम हर दिन के डेटा को तुरंत ट्रैक कर पाएंगे, जिससे सुधारात्मक कदम समय पर उठाए जा सकेंगे।"