
कोलकाता/दिल्ली: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आ गया है। चुनाव रणनीतिकार संस्था I-PAC के दफ्तर पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी ने राज्य की सत्ता के गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। कानूनी विशेषज्ञों और मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को देखें तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मुश्किलें आने वाले दिनों में काफी बढ़ सकती हैं। चर्चा यहाँ तक है कि क्या बंगाल में भी दिल्ली और झारखंड जैसी स्थिति पैदा होने वाली है?
PMLA की धारा 67: ED का वो ब्रह्मास्त्र जो बदल देगा गेम
I-PAC प्रकरण में इस वक्त ED का पलड़ा भारी नजर आ रहा है। कानूनी जानकारों के मुताबिक, PMLA की धारा 67 जांच एजेंसी को वे अहम अधिकार देती है, जिनके आगे बड़े-बड़े सूरमा भी बेबस नजर आते हैं। यदि जांच के दौरान यह सिद्ध हो जाता है कि सबूतों के साथ छेड़छाड़ की गई है या उन्हें हटाने की कोशिश हुई है, तो स्थिति गंभीर हो सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सबूत मिटाने का आरोप पुख्ता होता है, तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की गिरफ्तारी तक की नौबत आ सकती है। राजनीतिक गलियारों में इस घटनाक्रम की तुलना अरविंद केजरीवाल और हेमंत सोरेन के मामलों से की जा रही है, जहाँ जांच एजेंसियों की सख्ती के बाद मुख्यमंत्रियों को हिरासत में लेना पड़ा था।
ममता का पलटवार: ED पर ही दर्ज करा दी FIR
ममता बनर्जी ने भी साफ कर दिया है कि वह झुकने वाली नहीं हैं। ED की कार्रवाई के जवाब में मुख्यमंत्री ने एक ऐसा कदम उठाया है जिसे देश के न्यायिक इतिहास में 'अभूतपूर्व' माना जा रहा है। ममता बनर्जी ने शेक्सपीयर सरणी और विधाननगर थाने में खुद ED के अधिकारियों के खिलाफ अभियोग दर्ज करा दिया है।
यह पहली बार है जब किसी राज्य की मुखिया ने सीधे केंद्रीय जांच एजेंसी पर ही कानूनी शिकंजा कसने की कोशिश की है। इसे केंद्र बनाम राज्य की सीधी जंग के रूप में देखा जा रहा है।
दिल्ली में महामंथन: क्या होगा अगला बड़ा कदम?
I-PAC कार्यालय पर छापेमारी के बाद अब गेंद दिल्ली के पाले में है। आज दिल्ली स्थित ED मुख्यालय में एक बेहद महत्वपूर्ण वर्चुअल बैठक प्रस्तावित है। इस बैठक में ED के शीर्ष अधिकारी राहुल नवीन और अन्य वरिष्ठ अधिकारी कोलकाता के ग्राउंड अफसरों के साथ रणनीति साझा करेंगे।
सूत्रों की मानें तो इस बैठक में छापेमारी के दौरान मिले दस्तावेजों और डिजिटल सबूतों की समीक्षा की जाएगी। यदि I-PAC के डेटा से कुछ भी आपत्तिजनक मिलता है, तो बंगाल की राजनीति में गिरफ्तारी का अगला दौर जल्द ही शुरू हो सकता है।
निष्कर्ष: क्या बंगाल में लगेगा राष्ट्रपति शासन?
जिस तरह से जांच एजेंसी और राज्य सरकार के बीच टकराव चरम पर पहुँच गया है, उससे यह सवाल भी उठने लगा है कि क्या बंगाल में संवैधानिक संकट पैदा हो रहा है? एक तरफ ED का सख्त कानूनी शिकंजा है, तो दूसरी तरफ ममता बनर्जी का आक्रामक तेवर। आने वाले 24 घंटे बंगाल की सियासत के लिए बेहद निर्णायक साबित होने वाले हैं।