
बिजावर। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में भ्रष्टाचार का एक अनोखा और हैरान करने वाला मामला सामने आया है। सरकारी रिकॉर्ड में हेराफेरी कर एक अतिथि शिक्षक को 'मजदूर' दिखाकर मनरेगा के बजट से हजारों रुपये डकारने वाले ग्राम रोजगार सहायक (GRS) पर गाज गिरी है। जिला पंचायत सीईओ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी रोजगार सहायक को जनपद पंचायत बिजावर में अटैच कर दिया है।
शिक्षक के नाम पर निकाली मजदूरी
पूरा मामला जनपद पंचायत बिजावर की ग्राम पंचायत कदवारा का है। तत्कालीन ग्राम रोजगार सहायक शंकर लोधी पर आरोप है कि उसने नियमों को ताक पर रखकर भारी फर्जीवाड़ा किया। शंकर लोधी ने अतिथि शिक्षक उत्तम लोधी के नाम पर मनरेगा योजना के तहत मस्टर रोल जारी किए और उसे मजदूर दर्शाकर सरकारी खजाने से 10,562 रुपये का अवैध आहरण कर लिया।
जब इस धांधली की शिकायत हुई, तो जिला पंचायत सीईओ और अतिरिक्त जिला कार्यक्रम समन्वयक नमः शिवाय अरजरिया ने तत्काल मामले का संज्ञान लिया। शिकायत की शुरुआती जांच विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी (BEO) बिजावर से कराई गई, जिसमें चौंकाने वाली पुष्टि हुई कि जिस व्यक्ति को मजदूर बताकर पैसे निकाले गए, वह असल में एक अतिथि शिक्षक है।
जांच दल गठित, वेतन में 50% की कटौती
शिकायत और आरोपों की प्रारंभिक पुष्टि होने के बाद, जिला पंचायत सीईओ ने भ्रष्टाचार के इस खेल की तह तक जाने के लिए तीन सदस्यीय जांच दल का गठन कर दिया है। यह टीम अगले 2 महीने के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपेगी।
कार्रवाई के दायरे में आया रोजगार सहायक
आरोपी शंकर लोधी, जो वर्तमान में ग्राम पंचायत नगदा में पदस्थ था, उसे तत्काल प्रभाव से वहां से हटाकर जनपद पंचायत कार्यालय बिजावर में संलग्न (Attach) कर दिया गया है। जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक आरोपी को प्रावधानों के अनुसार केवल 50 प्रतिशत मानदेय ही देय होगा।
भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार
प्रशासन की इस कार्रवाई से जिले के अन्य लापरवाह और भ्रष्ट कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है। मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण योजना, जो गरीबों के रोजगार के लिए है, उसमें एक शिक्षक का नाम मस्टर रोल में दर्ज करना न केवल वित्तीय अनियमितता है बल्कि पद का दुरुपयोग भी है। अब सबकी नजरें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिसके बाद आरोपी पर और भी सख्त कानूनी कार्रवाई या सेवा समाप्ति की तलवार लटक सकती है।