
दमोह, मध्यप्रदेश: मध्यप्रदेश के दमोह जिले में स्थित हटा कस्बे से एक ऐसी हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है, जिसने स्वास्थ्यकर्मियों से लेकर स्थानीय लोगों तक, सभी को चौंका दिया है। यहां स्नेह गांव की निवासी एक 38 वर्षीय आदिवासी महिला ने अपने 10वें बच्चे को जन्म दिया है। यह अपने आप में एक अनोखा मामला है, लेकिन सबसे आश्चर्यजनक बात यह है कि इस महिला ने अपने इससे पहले के सभी 9 स्वस्थ बच्चों को घर पर ही जन्म दिया था, वह भी बिना किसी चिकित्सकीय सहायता के!
क्यों खास है यह 10वीं डिलीवरी?
स्नेह गांव की निवासी कुसुम आदिवासी (38) के घर में यह खुशियों की किलकारी गूंजी है। उनके सबसे बड़े बेटे की उम्र पहले ही 17 वर्ष हो चुकी है। पूर्व की सभी नौ डिलीवरी घर पर होने के बाद, 10वीं बार में स्वास्थ्यकर्मियों ने हस्तक्षेप किया।
आशा कार्यकर्ता को जैसे ही पता चला कि महिला फिर से गर्भवती है और यह उसकी 10वीं डिलीवरी होने वाली है, उन्होंने इसे हाई रिस्क डिलीवरी मानते हुए महिला को समझाया। स्वास्थ्य और परिवार नियोजन के महत्व को देखते हुए, आशा कार्यकर्ता ने सुनिश्चित किया कि इस बार महिला की डिलीवरी किसी भी कीमत पर अस्पताल में ही हो। महिला को तत्परता से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) लाया गया।
हाई रिस्क पर थी मां, फिर भी हुई नॉर्मल डिलीवरी
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में महिला की 10वीं डिलीवरी सफलतापूर्वक कराई गई। इस पूरे मामले को संभालने वाली नर्स देवकी कुर्मी ने मीडिया को बताया कि महिला हाई रिस्क जोन में थी, क्योंकि अधिक संख्या में और कम अंतराल पर बच्चों को जन्म देना मां के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा करता है।
नर्स कुर्मी ने बताया, "महिला की पूर्व की सभी नौ डिलीवरी घर पर हुई थीं, जो कि जोखिम भरा था। 10वीं डिलीवरी में हमने पूरा ध्यान रखा। अच्छी बात यह रही कि डिलीवरी सामान्य (नॉर्मल) हुई और मां व बच्चा दोनों पूरी तरह सुरक्षित हैं।" जन्म लेने वाला बच्चा 3.5 किलोग्राम वजनी है, जिसे एक स्वस्थ नवजात माना जाता है।
डॉक्टरों के सवाल पर पति ने दिया चौंकाने वाला जवाब
महिला की 10 संतानों में अब तीन बेटे और सात बेटियां शामिल हैं। अस्पताल में डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों ने जब महिला के पति से परिवार नियोजन और ऑपरेशन न कराने को लेकर सवाल किया, तो उनका जवाब चौंकाने वाला था।
रिस्क और परिवार नियोजन के बारे में पूछे जाने पर पति ने स्पष्ट कहा, "अब हम ऑपरेशन करा लेंगे।" इस घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों में परिवार नियोजन के प्रति जागरूकता की कमी और बच्चों की बड़ी संख्या के सामाजिक-आर्थिक पहलुओं पर एक बार फिर से बहस छेड़ दी है।
यह मामला दिखाता है कि आज भी ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं और परिवार नियोजन के कार्यक्रमों को जमीनी स्तर पर और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता है, ताकि माता और बच्चों के जीवन को जोखिम से बचाया जा सके। कुसुम आदिवासी ने भले ही अपने 10वें बच्चे को सुरक्षित जन्म दिया हो, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे एक गंभीर स्वास्थ्य चेतावनी के रूप में देख रहे हैं। यह कहानी परिवार नियोजन की आवश्यकता और हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के प्रति जागरूकता फैलाने का एक बड़ा उदाहरण है।