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22 साल का इंतजार खत्म! S.I.R अभियान ने मां को लौटाया उसका 'खोया हुआ लाल', फिल्म जैसी है ये कहानी

2026-01-11  Editor Shubham Jain  446 views

ImgResizer_1768101272971मंदसौर: कहते हैं कि अगर किसी को शिद्दत से चाहो तो पूरी कायनात उसे तुमसे मिलाने में जुट जाती है। कुछ ऐसा ही फिल्मी मंजर मंदसौर में हकीकत बनकर उभरा है। भारत निर्वाचन आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (S.I.R) अभियान ने एक ऐसी मां की सूनी गोद भर दी है, जिसने पिछले 22 वर्षों से अपने बेटे की शक्ल तक नहीं देखी थी।

यह कहानी केवल एक पुलिस कार्रवाई नहीं, बल्कि भावनाओं के उस सैलाब की है जो दो दशकों के लंबे इंतजार के बाद बांध तोड़कर बाहर निकला।

क्या है पूरा मामला?

मंदसौर के खिलचीपुरा (ढाकरिया मोहल्ला) के रहने वाले विनोद पिता बालूराम गायरी साल 2003 में अचानक लापता हो गए थे। उस समय विनोद की उम्र करीब 23 साल थी। परिजनों ने दर-दर की ठोकरें खाईं, थानों के चक्कर लगाए और करीब 15 सालों तक विनोद को पागलों की तरह ढूंढा। जब कोई सुराग नहीं मिला, तो थक-हारकर उन्होंने नियति को ही अपना सच मान लिया। लेकिन मां रामकन्या का दिल हमेशा कहता था कि उसका बेटा एक दिन जरूर लौटेगा।

एक छोटी सी 'वोटर आईडी' की रिक्वेस्ट और खुल गया राज

विनोद, जो अब 45 वर्ष के हो चुके हैं, वर्तमान में राजस्थान के नागौर जिले में एक स्कूल में चपरासी के पद पर कार्यरत हैं। सालों पहले उन्होंने पुष्पा नाम की युवती से प्रेम विवाह किया था और घर छोड़कर चले गए थे।

हाल ही में चुनाव आयोग के S.I.R अभियान के दौरान विनोद को मतदाता सूची में अपना नाम जुड़वाने की जरूरत पड़ी। इसके लिए उन्होंने अपनी ग्राम पंचायत से अपने माता-पिता का ईपीक (EPIC) नंबर मांगा। जैसे ही यह जानकारी मंदसौर में उनके परिवार तक पहुंची, घर में हलचल मच गई। मां रामकन्या ने तुरंत थाना नई आबादी में आवेदन देकर मदद की गुहार लगाई।

पुलिस की तत्परता ने रंग लाया परिणाम

थाना प्रभारी उप निरीक्षक कुलदीप सिंह राठौर ने मामले की गंभीरता को समझा। पुलिस टीम ने तकनीकी साक्ष्यों, ग्राम पंचायत और तहसील निर्वाचन कार्यालय के साथ तालमेल बिठाकर विनोद का वर्तमान पता निकाल लिया। पुलिस की एक टीम ने राजस्थान के नागौर में संपर्क किया और पाया कि विनोद वहां अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ एक खुशहाल जीवन बिता रहे हैं।

भावुक मिलन: “अब मां को साथ ले जाऊंगा”

जब पुलिस के माध्यम से विनोद अपनी मां के सामने आए, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। 22 साल बाद अपने बेटे, बहू और पोतों को देखकर मां रामकन्या की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। विनोद ने बताया कि वह अब राजस्थान में ही बस चुके हैं, लेकिन उन्होंने इच्छा जताई कि वह अपनी मां को भी अपने साथ राजस्थान ले जाकर उनकी सेवा करना चाहते हैं।

पुलिस और प्रशासन की सराहना

इस पुनर्मिलन ने यह साबित कर दिया कि सरकारी अभियान केवल कागजी कार्रवाई नहीं होते, बल्कि कभी-कभी बिछड़े हुए दिलों को जोड़ने का जरिया भी बनते हैं। रामकन्या ने रुंधे गले से पुलिस प्रशासन का आभार व्यक्त किया। इलाके में इस सुखद मिलन की चर्चा हर जुबान पर है।


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