
शैलेन्द्र चौधरी पठारी। भोपाल के हमीदिया अस्पताल में 16 दिन तक चले इलाज के बाद एक युवक की मौत ने पूरे इलाके में तनाव पैदा कर दिया। युवक की मौत के बाद उसका शव जैसे ही गांव पहुंचा, मृतक के आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों ने पठारी–गंजबासौदा–कुरवाई मार्ग पर चक्काजाम कर दिया। यह विरोध प्रदर्शन लगभग 7 घंटे तक जारी रहा, जिसने पुलिस और प्रशासन को घंटों मशक्कत करने पर मजबूर कर दिया।
क्या है पूरा मामला?
बताया जा रहा है कि यह पूरा मामला 1 अक्टूबर को दो पक्षों में हुई पुरानी लड़ाई से जुड़ा है। इस विवाद में युवक गंभीर रूप से घायल हो गया था, जिसे इलाज के लिए भोपाल के हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया। 16 दिनों तक जिंदगी और मौत के बीच जूझने के बाद युवक ने दम तोड़ दिया। जब मृतक का शव गांव लाया गया, तो परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। उनका आरोप था कि युवक की मौत के लिए कहीं न कहीं लड़ाई से जुड़े मामले में पुलिस की ढिलाई और अस्पताल प्रशासन की लापरवाही जिम्मेदार है।
सड़क पर उतरा पूरा प्रशासनिक अमला
चक्काजाम की सूचना मिलते ही प्रशासन में हड़कंप मच गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मौके पर तुरंत एसडीएम, एसडीओपी और तहसीलदार सहित आस-पास के 6 थानों की पुलिस फोर्स को तैनात किया गया। प्रदर्शनकारियों को समझाने-बुझाने की कोशिशें शुरू हुईं, लेकिन मृतक के परिजन मुआवजे और दोषियों पर कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे।
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग थी कि मृतक के परिजनों को 20 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए और मामले से जुड़े दोषी पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
'कलेक्टर और SP को बुलाओ!': जिद पर अड़े परिजन
विरोध कर रहे परिजन मौके पर मौजूद स्थानीय अधिकारियों की बात सुनने को तैयार नहीं थे। वे जिद पर अड़े थे कि वे केवल कलेक्टर और एसपी से ही बात करेंगे। इस दौरान लोगों में पुलिस प्रशासन के खिलाफ जबरदस्त आक्रोश देखने को मिला। भीड़ बार-बार 'पुलिस प्रशासन मुर्दाबाद' के नारे लगा रही थी, जिससे माहौल और तनावपूर्ण हो गया था।
तनाव की स्थिति उस समय और बढ़ गई जब पीड़ित पक्ष के कुछ रिश्तेदार शराब के नशे में थे। उनके उग्र व्यवहार के कारण समझाइश के सभी प्रयास विफल हो रहे थे।
प्रशासन की 'चतुराई' से खुला रास्ता
चक्काजाम को हटाने के लिए प्रशासन और पुलिस को घंटों पसीना बहाना पड़ा। हालांकि, अधिकारियों ने समझदारी और चतुराई से काम लिया। उन्होंने पहले पीड़ित पक्ष के कुछ समझदार लोगों को भरोसे में लिया और उच्च अधिकारियों से उनकी मांगों पर विचार करने का आश्वासन दिया। लंबी जद्दोजहद और समझाइश के बाद, प्रशासन और पुलिस की सूझबूझ से आखिरकार लगभग 7 घंटे बाद चक्का जाम हटाया जा सका और मार्ग पर यातायात बहाल हुआ।
वाहन चालकों को मिली राहत
राहत की बात यह रही कि स्थानीय पुलिस ने स्थिति को संभालते हुए प्रदर्शन वाले मार्ग पर आने वाले वाहनों को समय रहते बाईपास की ओर मोड़ दिया। इस कारण आम वाहन चालक परेशान नहीं हुए और न ही मार्ग पर लंबी-लंबी लाइनें लगीं। चक्काजाम से आम जनजीवन पर ज्यादा असर नहीं पड़ा, लेकिन पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल जरूर खड़े हो गए हैं। इस पूरे मामले में अब देखना होगा कि प्रशासन मुआवजे और दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग पर क्या कदम उठाता है।