पठारी। पठारी-बडोह क्षेत्र का प्रसिद्ध पर्यटक स्थल गडरमल मंदिर अपनी ऐतिहासिक और आकर्षक कलाकृतियों के लिए दूर-दूर तक पहचान रखता है। यहां देश के विभिन्न हिस्सों के साथ विदेशों से भी पर्यटक और इतिहास व पुरातत्व में रुचि रखने वाले लोग पहुंचते हैं। लेकिन मुख्य मार्ग से गडरमल मंदिर तक पहुंचने वाली महज करीब 800 मीटर सड़क का निर्माण नहीं होने के कारण पर्यटकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। खासकर बारिश के दिनों में यह परेशानी कई गुना बढ़ जाती है।
मुख्य मार्ग से मंदिर तक पहुंचने वाला रास्ता कच्चा और जगह-जगह उखड़ा हुआ है। बारिश होने पर इसी रास्ते पर पानी और कीचड़ जमा हो जाता है। ऐसे में दोपहिया और चार पहिया वाहनों से मंदिर तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। कई पर्यटक रास्ते की स्थिति देखकर आगे जाने का जोखिम नहीं उठाते और गडरमल मंदिर की ऐतिहासिक कलाकृतियों को देखे बिना ही वापस लौटने को मजबूर हो जाते हैं।
800 मीटर का रास्ता बन रहा बड़ी बाधा
स्थानीय लोगों के अनुसार पठारी-बडोह के मुख्य मार्ग से गडरमल मंदिर की दूरी करीब 800 मीटर ही है, लेकिन इस छोटे से हिस्से में सड़क की सुविधा नहीं होने के कारण पर्यटकों का काफी समय रास्ते में ही लग जाता है। कई बार स्थिति ऐसी बन जाती है कि मुख्य मार्ग से मंदिर तक पहुंचने में करीब आधा घंटा लग जाता है।
विडंबना यह है कि पर्यटक जिस ऐतिहासिक स्थल को देखने पहुंचते हैं, वहां तक पहुंचने में ही उन्हें सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र की भौगोलिक और ऐतिहासिक पहचान को देखते हुए इस छोटे से सड़क मार्ग का निर्माण लंबे समय से जरूरी महसूस किया जा रहा है।
बारिश में कीचड़ और पानी से बढ़ जाती है परेशानी
मानसून के दौरान कच्चे रास्ते की स्थिति और खराब हो जाती है। जगह-जगह पानी भरने तथा कीचड़ होने से रास्ता फिसलन भरा हो जाता है। ऐसे में पर्यटकों को वाहन निकालने में परेशानी होती है। पैदल जाने वाले लोगों के लिए भी रास्ता आसान नहीं रहता।
बाहर से आने वाले कई सैलानी परिवार के साथ गडरमल मंदिर पहुंचते हैं। लेकिन रास्ते की खराब स्थिति देखकर उन्हें अपनी यात्रा अधूरी छोड़नी पड़ती है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि सड़क का निर्माण हो जाए तो बारिश के मौसम में भी पर्यटक आसानी से मंदिर तक पहुंच सकेंगे।
करोड़ों खर्च के बीच छोटे से मार्ग पर सवाल
सरकार और पर्यटन विभाग द्वारा प्रदेश के विभिन्न पर्यटन स्थलों को विकसित करने के लिए लगातार योजनाएं संचालित की जा रही हैं। पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए सड़क, पार्किंग, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था और अन्य मूलभूत सुविधाओं पर काम किया जा रहा है।
ऐसे में स्थानीय लोगों का सवाल है कि पठारी-बडोह जैसे ऐतिहासिक और पर्यटक महत्व वाले स्थल तक पहुंचने के लिए यदि केवल करीब 800 मीटर सड़क का निर्माण हो जाए तो बड़ी संख्या में पर्यटकों को राहत मिल सकती है। इस छोटे से मार्ग के अभाव में पूरे पर्यटन स्थल की पहुंच प्रभावित हो रही है।
पर्यटकों को मिल सकती है बड़ी राहत
गडरमल मंदिर की ऐतिहासिक कलाकृतियां पर्यटकों और इतिहास प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं। यदि मुख्य मार्ग से मंदिर तक पक्की सड़क का निर्माण कर दिया जाए तो यहां आने वाले लोगों को काफी सुविधा मिल सकती है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सड़क बनने के बाद न केवल बारिश के मौसम में आवागमन आसान होगा, बल्कि बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के साथ आने वाले पर्यटकों को भी राहत मिलेगी। बेहतर सड़क होने से पर्यटकों के यहां अधिक समय रुकने और आसपास के अन्य स्थलों को देखने की संभावना भी बढ़ सकती है।
पर्यटन विकास से स्थानीय लोगों को भी मिलेगा लाभ
स्थानीय लोगों का मानना है कि गडरमल मंदिर तक पहुंचने के लिए सड़क बनने से पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। पर्यटकों की संख्या बढ़ने से स्थानीय स्तर पर छोटे व्यवसाय, खान-पान, परिवहन और अन्य सेवाओं से जुड़े लोगों को भी रोजगार और आय के अवसर मिल सकते हैं।
पठारी-बडोह क्षेत्र को पर्यटन के नक्शे पर और बेहतर पहचान दिलाने के लिए मूलभूत सुविधाओं का विकास जरूरी है। सड़क जैसी बुनियादी सुविधा उपलब्ध होने से इस ऐतिहासिक स्थल तक पहुंच आसान होगी और क्षेत्र की पर्यटन संभावनाओं का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा।
नागरिकों ने शासन-प्रशासन से की सड़क निर्माण की मांग
स्थानीय नागरिकों ने शासन-प्रशासन और संबंधित पर्यटन विभाग से गडरमल मंदिर तक करीब 800 मीटर सड़क का निर्माण कराने की मांग की है। नागरिकों का कहना है कि सड़क निर्माण का काम होने से पर्यटकों को बारिश के दिनों में होने वाली परेशानी से राहत मिलेगी और गडरमल मंदिर की ऐतिहासिक विरासत को देखने आने वाले सैलानियों को निराश होकर वापस नहीं लौटना पड़ेगा।
स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए स्थल का निरीक्षण कर सड़क निर्माण की दिशा में आवश्यक कदम उठाएगा। यदि यह छोटा सा मार्ग पक्का हो जाता है तो गडरमल मंदिर तक पहुंच आसान होने के साथ-साथ पठारी-बडोह क्षेत्र के पर्यटन विकास को भी नई गति मिल सकती है।
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