छतरपुर। जिला अधिवक्ता संघ छतरपुर ने दो अधिवक्ताओं के खिलाफ कार्रवाई करते हुए जिला न्यायालय में उनकी सेवाएं समाप्त करने का निर्णय लिया है। संघ ने मंगलवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में कार्रवाई की जानकारी दी। संघ पदाधिकारियों के अनुसार, यह निर्णय अधिवक्ताओं से जुड़े एक विवादित मामले और न्यायालय की गरिमा तथा पेशेवर आचार संहिता को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
संघ के मुताबिक मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता इम्तियाज सिद्दीकी के खिलाफ एक जूनियर महिला अधिवक्ता ने गंभीर आरोप लगाए थे। शिकायत के आधार पर सिविल लाइन थाना पुलिस द्वारा दुष्कर्म और एससी-एसटी एक्ट की धाराओं में प्रकरण दर्ज किए जाने की जानकारी पत्रकार वार्ता में दी गई।
लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े दस्तावेजों का मामला
जिला अधिवक्ता संघ के पदाधिकारियों के अनुसार, इम्तियाज सिद्दीकी और संबंधित जूनियर अधिवक्ता के बीच लिव-इन रिलेशनशिप में रहने तथा वैवाहिक अनुबंध से जुड़े दस्तावेज तैयार किए गए थे।
संघ ने पत्रकार वार्ता में दावा किया कि इन दस्तावेजों की नोटरी अधिवक्ता शकुंतला अहिरवार द्वारा की गई थी। संघ के मुताबिक, संबंधित प्रक्रिया जिला अधिवक्ता संघ की अनुमति के बिना किए जाने और मामले की गंभीरता को देखते हुए दोनों अधिवक्ताओं के संबंध में कार्रवाई पर विचार किया गया।
बैठक में लिया गया सेवाएं समाप्त करने का फैसला
संघ पदाधिकारियों के अनुसार मामले को लेकर जिला अधिवक्ता संघ की बैठक आयोजित की गई। बैठक में सामने आए तथ्यों और संघ के स्तर पर विचार-विमर्श के बाद इम्तियाज सिद्दीकी और शकुंतला अहिरवार की जिला न्यायालय में सेवाएं समाप्त करने का निर्णय लिया गया।
यह कार्रवाई जिला अधिवक्ता संघ के स्तर पर की गई है। पुलिस द्वारा दर्ज मामले में लगाए गए आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से ही होगा।
न्यायालय की गरिमा को लेकर संघ सख्त
पत्रकार वार्ता में जिला अधिवक्ता संघ ने न्यायालय की गरिमा और अधिवक्ताओं की पेशेवर आचार संहिता को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की।
संघ ने कहा कि न्यायालय परिसर में अधिवक्ताओं के आचरण को लेकर किसी प्रकार की अनुशासनहीनता स्वीकार नहीं की जाएगी। संघ पदाधिकारियों ने कहा कि यदि कोई अधिवक्ता शराब के नशे में न्यायालय परिसर में आता है या नशे की स्थिति में न्यायिक कार्य करता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ भी संघ स्तर पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
आचार संहिता के पालन पर जोर
अधिवक्ता संघ ने कहा कि न्यायालय में अधिवक्ताओं की भूमिका केवल कानूनी पैरवी तक सीमित नहीं है, बल्कि न्यायिक व्यवस्था की गरिमा बनाए रखना भी उनकी जिम्मेदारी है। इसी कारण संघ ने पेशेवर आचरण और अनुशासन के नियमों का पालन सुनिश्चित करने की बात कही है।
फिलहाल दो अधिवक्ताओं की सेवाएं समाप्त करने का निर्णय जिला अधिवक्ता संघ द्वारा लिया गया है। वहीं, संबंधित आपराधिक मामले में लगाए गए आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष अदालत की न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
नोट: दुष्कर्म और एससी-एसटी एक्ट से संबंधित आरोप पुलिस प्रकरण में दर्ज शिकायत/मामले पर आधारित हैं। इन्हें न्यायालय द्वारा सिद्ध तथ्य नहीं माना जाना चाहिए। संबंधित पक्षों का पक्ष और न्यायालय का अंतिम निर्णय सामने आने पर स्थिति और स्पष्ट होगी।
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