पठारी। बालाजी धाम बडोह में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन रविवार को श्रद्धा और भक्ति का वातावरण देखने को मिला। कथा व्यास पंडित दिवाकर कृष्ण आचार्य जी ने भगवान श्रीकृष्ण की महिमा के साथ श्रीमद्भागवत के महत्वपूर्ण प्रसंगों का वर्णन करते हुए सुखदेव जी के जन्म की अद्भुत और रहस्यमयी कथा सुनाई। कथा के दौरान श्रद्धालु बड़ी संख्या में मौजूद रहे और धार्मिक प्रसंगों को ध्यानपूर्वक सुना।
कथा वाचन के दौरान पंडित दिवाकर कृष्ण आचार्य जी ने सुखदेव जी के जन्म से जुड़े पौराणिक प्रसंग का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि सुखदेव जी का जन्म सामान्य तरीके से नहीं हुआ था। उनके जन्म से जुड़ी कथा भगवान शिव और माता पार्वती से संबंधित है, जिसमें अमरत्व की कथा सुनने और उसके प्रभाव से जुड़े प्रसंग का वर्णन मिलता है।
भगवान शिव सुना रहे थे अमरत्व की कथा
कथावाचक ने बताया कि एक बार भगवान शिव माता पार्वती को अमरत्व की कथा सुना रहे थे। भगवान शिव कथा का वर्णन कर रहे थे और माता पार्वती बीच-बीच में हुंकारा भर रही थीं। कथा सुनते-सुनते माता पार्वती को नींद आ गई, लेकिन भगवान शिव को इसका पता नहीं चला।
कथा पूरी होने के बाद भगवान शिव ने जब पीछे देखा तो माता पार्वती को सोता हुआ पाया। तब उनके मन में प्रश्न उठा कि जब पार्वती सो रही थीं तो कथा के दौरान हुंकार कौन भर रहा था। भगवान शिव ने आसपास देखा तो वहां एक तोता बैठा दिखाई दिया।
पंडित दिवाकर कृष्ण आचार्य ने कथा को आगे बढ़ाते हुए बताया कि भगवान शिव को पता चला कि उस तोते ने उनकी अमरत्व की कथा सुन ली थी। इससे भगवान शिव क्रोधित हो गए और उन्होंने तोते को पकड़ने के लिए उसका पीछा करना शुरू कर दिया।
तीनों लोकों में भागता रहा तोता
भगवान शिव के क्रोध से बचने के लिए तोता अपनी जान बचाकर भागा। कथा के अनुसार वह तीनों लोकों में घूमता हुआ अंततः महर्षि वेदव्यास के आश्रम तक पहुंच गया। यहां उसे अपने लिए सुरक्षित स्थान दिखाई दिया।
वेदव्यास जी के आश्रम में उनकी पत्नी कपड़े सुखा रही थीं। कथा के अनुसार उसी समय उन्हें जम्हाई आई। तोते ने सूक्ष्म रूप धारण किया और उनके मुख के माध्यम से गर्भ में प्रवेश कर लिया। इस प्रकार वह वेदव्यास जी के परिवार से जुड़ गया और आगे चलकर सुखदेव जी के रूप में प्रसिद्ध हुआ।
वेदव्यास के अनुरोध पर शांत हुआ भगवान शिव का क्रोध
कथा के अनुसार भगवान शिव उस स्थान पर भी पहुंचे और उन्होंने कहा कि अमरत्व की कथा बिना अनुमति सुनने वाले को वे जीवित नहीं छोड़ेंगे। तब वेदव्यास जी ने भगवान शिव से पूरी घटना का कारण पूछा। भगवान शिव ने उन्हें बताया कि तोते ने उनकी अमरत्व की कथा सुन ली है।
वेदव्यास जी ने भगवान शिव से विनम्रता पूर्वक कहा कि अब वह अमर हो चुका है, ऐसे में उसे मारना संभव नहीं है। उन्होंने भगवान शिव से करुणा और दया दिखाते हुए उसे क्षमा करने का अनुरोध किया।
कथा वाचक ने बताया कि वेदव्यास जी के आग्रह और अनुरोध से भगवान शिव का क्रोध शांत हुआ। यही प्रसंग आगे चलकर सुखदेव जी के जन्म की अद्भुत कथा के रूप में प्रसिद्ध हुआ।
कथा में उमड़ा श्रद्धालुओं का उत्साह
श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन बालाजी धाम बडोह में श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही। कथा के दौरान धार्मिक प्रसंगों के साथ भक्ति, ज्ञान और आध्यात्मिक संदेशों का सुंदर समावेश देखने को मिला। पंडित दिवाकर कृष्ण आचार्य जी ने कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को भगवान के प्रति आस्था, श्रद्धा और समर्पण का महत्व भी बताया।
कथा स्थल पर बालाजी धाम के महंत विष्णु दास जी महाराज, बालाजी धाम के युवराज रसिक जी महाराज सहित आयोजन से जुड़े श्रद्धालु और सेवक उपस्थित रहे। कथा के मुख्य यजमान श्रीमती किरण एवं चंद्र मोहन पटसरिया तथा उप यजमान श्रीमती कुसुम एवं सुमेर सिंह यादव सहित जितेंद्र सिंह ठाकुर, संजय चौहान, पृथ्वी चौहान, कार्तिक शर्मा, गुमान सिंह कुशवाहा सहित बड़ी संख्या में नगर और क्षेत्र के श्रद्धालु कार्यक्रम में शामिल हुए।
बालाजी धाम बडोह में चल रही श्रीमद्भागवत कथा को लेकर नगर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में श्रद्धालुओं में उत्साह बना हुआ है। कथा के प्रत्येक दिन धार्मिक प्रसंगों के माध्यम से श्रद्धालुओं को भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक परंपरा और भक्ति मार्ग से जुड़े संदेश सुनने का अवसर मिल रहा है।
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