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3 दिन की चकाचौंध के बाद अंधेरे में डूबी बौद्ध नगरी सांची की सड़के

09-08-2026  Editor Shubham Jain  64 views
3 दिन की चकाचौंध के बाद अंधेरे में डूबी बौद्ध नगरी सांची की सड़के

वसीम कुरेशी रायसेन विश्व प्रसिद्ध बौद्ध नगरी सांची की सड़कों पर 72 घंटे तक तो दिवाली जैसा माहौल रहा, लेकिन रविवार शाम ढलते ही सारा माजरा बदल गया। अंतरराष्ट्रीय वीआईपी मेहमानों की गाड़ियां सांची से बाहर निकलीं और पीछे छूट गया केवल स्याह अंधेरा। ब्रिक्स (BRICS) सम्मेलन में आए विदेशी मेहमानों के लिए जिस मुख्य राजमार्ग को दुल्हन की तरह सजाया गया था, वहां अब पांव पैदल चलना भी दूभर हो चुका है। सालभर से बंद पड़ी जिन स्ट्रीट लाइटों को चमकाकर प्रशासन अपनी पीठ थपथपा रहा था, उनका कनेक्शन रविवार शाम ढलते ही बेरहमी से काट दिया गया। सांची की जनता अब ठगी सी महसूस कर रही है और सीधा सवाल पूछ रही है कि यह कैसा छलावा है?

365 दिन का अंधेरा और महज 72 घंटे का दिखावा

भोपाल-विदिशा मुख्य मार्ग (स्टेट हाईवे) सांची की लाइफलाइन है। इस रूट से रोजाना करीब 5,000 से अधिक गाड़ियां गुजरती हैं। भारी-भरकम ट्रकों से लेकर दोपहिया सवार तक सब इसी रास्ते का इस्तेमाल करते हैं। पिछले पूरे एक साल से इस मुख्य मार्ग की स्ट्रीट लाइटें बंद पड़ी थीं। जनता ने कई बार गुहार लगाई, लेकिन नगर परिषद के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी।

अचानक ब्रिक्स देशों (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका) के प्रतिनिधिमंडल के दौरे का ऐलान हुआ और सोता हुआ प्रशासनिक अमला रातों-रात जाग उठा। केवल 3 दिनों के भीतर केबल सुधारी गई, नई चमचमाती एलईडी लाइटें लगाई गईं और खंभों पर ताजा रंग-रोगन कर दिया गया। तीन दिनों तक मुख्य मार्ग दिन की रोशनी जैसा जगमगाया। रविवार शाम को जैसे ही आखरी वीआईपी गाड़ी रवाना हुई, कर्मचारियों ने चुपचाप स्विच ऑफ कर दिया।

सांची के बाजारों में छाया सन्नाटा, बढ़ा हादसों का खतरा

मुख्य हाईवे पर रोशनी गायब होते ही हादसों का ग्राफ बढ़ने की आशंका गहरा गई है। अंधेरा पसरते ही शाम 7 बजे के बाद पैदल सड़क पार करना किसी खतरे के खेल से कम नहीं है।

इस प्रशासनिक नाफरमानी की सबसे बड़ी मार सांची के स्थानीय कारोबारियों पर पड़ रही है। सांची के मुख्य बाजार में 200 से ज्यादा दुकानें हैं। शाम ढलते ही सड़कों पर सन्नाटा छा जाता है, जिससे दुकानदारों का कारोबार रोजाना 30 से 40 फीसदी तक गिर जाता है।

  अमर सिंह (स्थानीय निवासी): “नगर पालिका हर महीने हमसे टैक्स वसूलती है। हमारे पैसों से ये वीआईपी लोगों को खुश करने के लिए 3 दिन की नौटंकी करते हैं और हमारे हिस्से में वही पुराना अंधेरा छोड़ देते हैं।”

  राजेश जैन (व्यापारी): “रोशनी बंद होते ही चोर-उचक्कों के हौसले बुलंद हो जाते हैं। पहले भी अंधेरे का फायदा उठाकर कई दुकानों में चोरियां हो चुकी हैं। अगर कल को कोई बड़ा हादसा हुआ तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?”

वीआईपी कल्चर की सनक और पंगु प्रशासनिक ढांचा

यह पूरी घटना हमारी प्रशासनिक प्राथमिकताओं की पोल खोलती है। जब विदेशी मेहमानों को सांची की चमक-दमक दिखानी थी, तब बजट भी था, मैनपावर भी थी और इच्छाशक्ति भी। अफसर दिन-रात सड़कों पर खड़े होकर काम कराते दिखे।

रविवार शाम को अफसर अपनी गाड़ियों में वापस भोपाल और विदिशा लौट गए। उनके जाते ही बिजली का कनेक्शन कट गया। नगर परिषद के गलियारों से अब यह बहाना छनकर आ रहा है कि स्ट्रीट लाइटों का भारी-भरकम बिजली बिल भरने का बजट नहीं है। जनता अब सवाल दाग रही है कि अगर 3 दिन के लिए सरकारी खजाने का मुंह खुल सकता है, तो आम जनता के लिए बजट का अकाल क्यों पड़ जाता है?

यूनेस्को धरोहर की साख पर लगा धब्बा

सांची कोई आम कस्बा नहीं, बल्कि यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल एक अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल है। यहां हर साल देश-विदेश से लाखों बौद्ध अनुयायी और पर्यटक आते हैं। स्तूपों के दर्शन के बाद विदेशी और भारतीय पर्यटक अक्सर शाम को शहर के बाजारों में टहलते हैं।

अंधेरे में डूबी सड़कें पर्यटकों के सामने भारत की बेहद शर्मनाक तस्वीर पेश करती हैं। जब विदेशी मेहमान आएं तब तो पर्दा डालकर सब छुपा लो, और उनके जाते ही फिर उसी खस्ताहाल स्थिति में आ जाओ। यह रवैया सांची के पर्यटन उद्योग और साख दोनों को भारी नुकसान पहुंचा रहा है।

सांची की जनता का अल्टीमेटम: ‘अब आर-पार की लड़ाई’

नगर के नागरिकों ने अब आर-पार के मूड में आकर जिला कलेक्टर और नगर परिषद के नाम अल्टीमेटम जारी करने का फैसला लिया है। नागरिकों की मुख्य मांगें:

 हाईवे की सभी स्ट्रीट लाइटों को तुरंत और स्थायी तौर पर चालू किया जाए।

  लाइटें बंद करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई हो।

  मेंटेनेंस के लिए एक अलग से टेक्निकल टीम तैनात की जाए।

  स्ट्रीट लाइट के बिजली बिल के लिए स्थायी बजट पास किया जाए।

  मुख्य मार्ग पर रात में पुलिस गश्त बढ़ाई जाए।

स्थानीय निवासियों ने साफ चेताया है कि यदि प्रशासन ने अगले 48 घंटों के भीतर लाइटें चालू नहीं कीं, तो वे सड़कों पर उतरकर चक्काजाम करेंगे और धरना प्रदर्शन करेंगे।

जनता को 365 दिन की रोशनी चाहिए, 3 दिन का नाटक नहीं

लोकतंत्र में सरकार और प्रशासन जनता के टैक्स से चलते हैं, किसी वीआईपी की मेहरबानी से नहीं। मेहमानों का स्वागत करना अच्छी परंपरा है, लेकिन अपने ही नागरिकों के साथ ऐसा सौतेला व्यवहार कतई बर्दाश्त के काबिल नहीं है। सांची की जनता को 365 दिन जगमगाती सड़कें चाहिए, 3 दिन का सरकारी नाटक नहीं। जिला प्रशासन को तुरंत इस मामले में संज्ञान लेकर लाइटें चालू करानी चाहिए, वर्ना सांची के लोगों का गुस्सा सड़कों पर फूटना तय है।


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